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परम पुनीत भारत धरा-धाम में सदैव परमात्मा के अहैतुक अनुग्रह से संत प्रवर परमाचार्य महानुभाव का प्रादुर्भाव होता रहा है | ऐसे महापुरुषों के सानिध्य से सनातन भारतीय संस्कृति हमेशा पाद्रवित होती रही है | परम तेजोमय, श्रेष्ठ, सद्गुणों से परिपूर्ण, विदुपी, स्वनामधन्य, परम भागवत अनुरागी, परम आचार्य श्री मनोज अवस्थी भी ऐसी ही भारतीय परम्परा के पोषक पुरोखा है, जिनके अवतरण मात्र से धराधाम पर कलिमल से कलुषित जीवों को भागवत नाम सुधा सहज सुलभ हो सकी |

ऐसे भागवत, मानस, प्रखर वक्ता श्री मनोज अवस्थी जी महाराज प्रभु क्रिपा का विस्तार करने उत्तर प्रदेश कि धरती पर स्थित औरैया जनपद के ग्राम सौंधे मऊ में दिनांक 02/02/1978 को अवतरित हुए है | परमाचार्य अवस्थी के सानिध्य की सुगन्ध से आज “सौंधे मऊ” ग्रामवासी गौरवान्वित हुए है, आचार्यवर अवस्थी जी के नाम से ही अब समस्त ग्राम वासियों को वैशिष्ट्यपूर्ण तरह से सारे देश में पहचाना जाने लगा है | ऐसे तपोमय संत प्रवर को पाकर हम सभी भी धन्यता का अनुभव कर रहे है |

ऐसे परम पुनीत भागवत महापुरुष के चरणो मे भावपूर्ण पुष्पआञ्जली अर्पित करते हुए प्रदान कर रहे है | आपके प्रादुर्भाव ने इस कहावत को चरितार्थ किया है कि – “धन्य होत माता पिता, धन्य होत कुल-गोत्र” | आज के युग के शिखर, भागवत, मानस मर्मज्ञ, श्री अवस्थी जी एक संस्कारी, ब्राह्मण मे श्रेष्ठ कान्यकुब्ज ब्राह्मण परिवार मे जन्मे है |

आपका परिवार अनादिकाल से ही पांडित्य कर्म ही करता रहा है | उसी परम्परा का निर्वाह करते हुए, पंडित श्री प्रेम नारायण अवस्थी जी तथा श्रीमती उमा देवी जी अवस्थी को पिता एवं माता होने का यशस्वी गौरव प्राप्त हुआ है | आपके पिताजी कर्मकांड के विशेषज्ञ और ज्योतिष के आचार्य है | आपकी दादी जी राम कटोरी व दादा जी बहमलीन गोविन्द जी अवस्थी जी ज्योतिश के प्रकाण्ड विद्वान थे |
आप का पैत्रिक भूमि ग्राम लोहा, जनपद जालौन, उत्तर प्रदेश है | आपका जन्म एव्म लालन-पालन ननिहाल मे हुआ, आप के नाना जी विन्ध्यवासिनी स्व. काशी प्रसाद शुक्ला जी उन दिनो गाव के जमीदार हुआ करते थे |

आपके द्वारा विद्यार्जन के उपरांत लौकिक परंपरा के अनुरूप ग्रहस्थ जीवन को स्वीकार करते हुए श्रेष्ठ विप्रवर श्री पशुपतिनाथ द्विवेदि जी व श्रीमति रामा द्विवेदि जी की भागवत-परायना विदुशी पुत्री प्रतिभा जी के साथ दाम्पत्य जीवन दिनांक 04/02/1999 को प्रारम्भ किया गया है । जिनके सहयोग से आपको दो पुत्र केशवम एवम मधुरम तथा एक पुत्री गौरी की प्रप्ति हुई।
वैवाहिक जीवन का निर्वाह करते हुए आचार्य श्री मनोज अवस्थी जी महाराज आज भी सन्त पथ पर अग्रसर है। आचर्यप्रवर श्री मनोज अवस्थी जी महाराज अपने शैशव काल से ही भागवत अनुरागी रहे है तथा इङ्के मुखर्बिन्दू से मात्र 16 वर्ष की अवस्था से भागवत एव्म रामचरितमानस पर मौलिक प्रवचनों की परम्परा का श्री गणेश होकर यह क्रम अनवरत चल रह है।

महाराज जी द्वारा परिपूर्ण किया जा चुका है। आचार्य श्री संस्कृत व हिन्दी भाषा के विद्वान और कथावाचक ही नही अपितु शास्त्रसम्मत जीवन परम्परा का निर्वहन करते हुए अपने जीवञ्चर्या से शिस्यो को आगम्य-ज्ञान का सम्यक दर्शन भी सुलभ कराते है। आपकी ज्ञान मीमांसा तर्क पूर्ण व वैशिट्य शैली से ओतप्रोत है, जहा इसमें भारतीय दर्शन के सभी आयामो की सम्यक झलक द्रस्तिगोचर होती है, वही इसमें तात्विक एवं आत्मज्ञान को भी सहजता से जनमानस को सुलभ कराया गया है। समाज मे व्याप्त कुरीतिओ के उन्मूलन का मार्ग प्रश्स्त होता है एव्म आपके द्वारा पदश्र वैशिष्य पूर्ण वक्तव्य के माध्यम से टूटते पारिवारिक सम्बन्धों मे सौहार्द और सहजता को बचाने तथा सम्बधॊ को व्यापक करने की संकल्पित दृष्टि भी परिलक्षित होती है।
आचार्य श्री मनोज अवस्थी जी द्वरा न केवल अर्वाचीन शैक्षणिक प्रणाली के अनुरूप अकादमिक शैक्षणिक दक्षता अर्जित की गयी है अपितु ऐसी सैधान्तिक शिक्षा को भी अपने जीवञ्चर्या के माध्यम से व्यवहारिक धरातल पर ऐसे वैशिस्त्य से विकसित किया है जो हमेशा कर्तव्य कर्मो के सम्पादन मे अनवरत रूप से उधत रहने को अभिप्रेरित करता है।

वस्तुत: महाराज श्री का सम्पूर्ण जीवन दर्शन अनुकरणीय है। महाराज श्री के परम पुरुषार्थी कर्तव्य से अभिप्रेरित होते हुए तत्कालीन मुख्यन्त्री, मध्य प्रदेश शासन, माननीय बाबूलाल गौर जी ने आचार्य श्री मनोज अवस्थी जी महाराज को ” विश्व भागवत रत्न” तथा ” मानस प्रदीप” उपधी से विभूशित किय गया है।

जहां एक ओर महाराज श्री की शैक्षणिक योग्यता के माध्यम से जन सामान्य को विलक्षणता का अनुभव होता है वही महाराज श्री का आध्यात्मिक जीवन भी अद्भुद एव्म अलॊकिक है । आपने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से हिन्दी में स्नातकोत्तर उपाधि एवम् ज्ञान ऒर धर्मधानि बनारस से संस्कृत मे स्नात्कोत्तर की उपाधि प्राप्त की है।

महाराज श्री का व्यक्तित्व ख्यातिलब्ध, प्रतिस्थिति, अनन्त श्री विभूषित स्वामी श्री अखण्डानन्द जी सरस्वती महाराज जी (आनंद आश्रम), व्रन्दावन के परम पूज्य गुरुदेव आचार्य स्वामी भागवतनन्द जी ( व्याकरण मनीषी तथा पांच विषयों मे एम. ए.)के गुरुत्व एवम् सानिध्य में पल्लवित एव्म पुष्पित हुआ है।
आचार्य श्री मनोज अवस्थी जी महाराज आज जो भी है जितने भी परम पूज्य गुरुदेव आचार्य स्वामी भागवतनन्द जी जी की असीम अनुकम्पा तथा चरणों की कृपा से है, तथा आप परम पूज्य गुरुदेव आचार्य स्वामी के वरद क्रपा पात्र है। गुरुदेव आचार्य स्वामी भागवतानन्द जी के चरनो की प्रसादी से आज आप ख्यातिलब्ध, धर्म ज्ञान मर्मग्य, प्रतिष्ठित अंतर्राष्‍ट्रीय कथाकार है ।

आपके अनुकर्णीय पुरुशाथो के माध्यम से आज लाखो धर्मावलम्बिओ को नया जीवन दर्शन प्राप्त हो रहा है। ऐसे आचार्य श्रेष्ठ का जीवन-परिचय लेखनी छमता से परे है । यह तो सकेत मात्र है, उस धूमकेतु की उपस्तिथि का जिस पर ग्रन्थो की रचना होगी ऒर भावी पीढ़ीयो के अनुकरण का आधार बनेगी।